भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में त्योहारों का विशेष महत्व है, और साल की शुरुआत में ही आने वाला सबसे बड़ा पर्व है मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026)। हर साल की तरह इस बार भी लोगों के मन में तारीख को लेकर भारी असमंजस है। क्या आप भी इस बात को लेकर कंफ्यूज हैं कि मकर संक्रांति 2026 कब है (Makar Sankranti 2026 Kab Hai)—14 जनवरी को या 15 जनवरी को?
काशी के प्रसिद्ध पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर, हम आपके लिए Thakur Prasad Calendar 2026 Makar Sankranti की एकदम सटीक जानकारी लेकर आए हैं। मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि ऋतु परिवर्तन और सूर्य की उपासना का महापर्व है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस लेख में हम आपको न केवल सही तारीख बताएंगे, बल्कि शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और राशि के अनुसार किए जाने वाले उपायों की भी विस्तृत जानकारी देंगे।
मकर संक्रांति 2026 कब है: तारीख और ज्योतिषीय गणना
मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के गोचर पर निर्भर करता है। अंग्रेजी कैलेंडर की तारीखों में भले ही बदलाव आता रहे, लेकिन हिंदू पंचांग सूर्य की स्थिति को सर्वोपरि मानता है। मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) के लिए जो सबसे बड़ा सवाल लोगों के मन में है, वह तारीख को लेकर है। इस वर्ष ज्योतिषीय गणनाओं और ग्रह स्थितियों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि संक्रांति का उत्सव 15 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा।
अक्सर जब सूर्य का मकर राशि में प्रवेश शाम या रात्रि के समय होता है, तो पुण्य काल अगले दिन माना जाता है। लेकिन Thakur Prasad Calendar 2026 Makar Sankranti के अनुसार, इस वर्ष सूर्य का संक्रमण काल और पुण्य काल की स्थिति 15 जनवरी के पक्ष में बन रही है। स्नान, दान और पूजा-पाठ के लिए यह दिन अत्यंत शुभ है।
वाराणसी (काशी) के विद्वानों और ज्योतिषाचार्यों का भी मत है कि सूर्य देव की उपासना और उत्तरायण का स्वागत 15 जनवरी को ही करना शास्त्र सम्मत होगा। इसलिए अपने कैलेंडर में 15 जनवरी की तारीख को मार्क कर लें और किसी भी प्रकार की भ्रांति में न रहें।
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश का समय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव अपने पुत्र शनि की राशि ‘मकर’ में प्रवेश करते हैं, तो उसे मकर संक्रांति कहते हैं। 2026 में सूर्य देव का यह गोचर 15 जनवरी को हो रहा है। पंचांग के अनुसार, संक्रांति का क्षण वह समय होता है जब सूर्य ठीक 0 डिग्री पर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस वर्ष यह संक्रमण काल 15 जनवरी को दिन के समय में ही प्रभावी हो रहा है, जिससे स्नान और दान का महत्व इसी दिन बढ़ जाता है।
ठाकुर प्रसाद कैलेंडर का मत
उत्तर भारत, विशेषकर बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में Thakur Prasad Calendar 2026 Makar Sankranti की तिथियों को सबसे प्रमाणिक माना जाता है। इस कैलेंडर की गणनाएं काशी की विद्वत परंपरा पर आधारित होती हैं। ठाकुर प्रसाद पंचांग के अनुसार भी 15 जनवरी 2026 को ही मकर संक्रांति का मान दिया गया है। पंचांग में स्पष्ट उल्लेख है कि उत्तरायण का पुण्य फल प्राप्त करने के लिए और खरमास की समाप्ति के लिए 15 जनवरी का दिन ही उपयुक्त है। इस दिन से सभी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, और गृह प्रवेश पुनः शुरू हो जाएंगे, जो पिछले एक महीने से वर्जित थे।
मकर संक्रांति तो साल की शुरुआत है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि 2026 में होली, दिवाली और छठ पूजा कब है? पूरे साल के सभी व्रत, त्योहार और विवाह मुहूर्त की सटीक जानकारी के लिए आप ठाकुर प्रसाद कैलेंडर 2026 और नया साल पंचांग यहाँ देख सकते है|
मकर संक्रांति 2026 शुभ मुहूर्त और पुण्य काल का सटीक समय
किसी भी त्योहार का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब उसे सही मुहूर्त में मनाया जाए। मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) के दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है, लेकिन यह तभी फलदायी होता है जब यह ‘पुण्य काल’ या ‘महा पुण्य काल’ के दौरान किया जाए। बहुत से लोग सुबह उठते ही स्नान कर लेते हैं, लेकिन शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय और संक्रांति के स्पर्श समय का मिलान करना आवश्यक है।
अगर आप जानना चाहते हैं कि मकर संक्रांति 2026 कब है (Makar Sankranti 2026 Kab Hai) और पूजा का सही समय क्या है, तो आपको पुण्य काल के इस विशेष समय को नोट करना चाहिए। ठाकुर प्रसाद पंचांग और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस वर्ष पुण्य काल की शुरुआत 14 जनवरी 2026 को रात 09:19 बजे से हो रही है, जो अगले दिन 15 जनवरी 2026 को दोपहर 01:24 बजे तक रहेगा।
चूँकि पुण्य काल की शुरुआत 14 तारीख की रात्रि से हो रही है, इसलिए जो लोग गंगा घाट या किसी पवित्र नदी पर जाकर स्नान करना चाहते हैं, उनके लिए 15 जनवरी की सुबह (सूर्योदय) का समय सर्वश्रेष्ठ रहेगा। वहीं, घर पर पूजा और दान-पुण्य करने के लिए आप 15 जनवरी को दोपहर 01:24 बजे से पहले का समय चुन सकते हैं। शुभ मुहूर्त में किया गया दान सौ गुना फल प्रदान करता है और जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश करता है।
महा पुण्य काल का समय और महत्व
महा पुण्य काल वह संकीर्ण समय सीमा होती है, जिसमें किया गया जप, तप और दान अक्षय फल देता है। मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) के लिए यह विशेष संयोग 14 और 15 जनवरी के मध्य बन रहा है।
- पुण्य काल आरम्भ: 14 जनवरी 2026, रात्रि 09:19 बजे से
- पुण्य काल समाप्ति: 15 जनवरी 2026, दोपहर 01:24 बजे तक
शास्त्रों के अनुसार, रात्रि में स्नान-दान वर्जित होता है (विशेष परिस्थितियों को छोड़कर), इसलिए व्यावहारिक रूप से 15 जनवरी की सुबह सूर्योदय के बाद से लेकर दोपहर 1:24 बजे तक का समय स्नान और दान के लिए ‘महा पुण्य काल’ के समान फलदायी रहेगा। इस दौरान सूर्य को अर्घ्य देना और तिल-गुड़ का दान करना अत्यंत लाभकारी है। शास्त्रों के अनुसार, इस समय सीमा के भीतर किया गया स्वर्ण, अन्न या वस्त्र का दान राजा बलि के दान के समान महान माना गया है। इसलिए प्रयास करें कि अपनी मुख्य पूजा 15 जनवरी को दोपहर 01:24 बजे से पहले संपन्न करें।
पुण्य काल में क्या करें और क्या न करें
पुण्य काल का समय महा पुण्य काल से थोड़ा लंबा होता है और यह पूरे दिन (सूर्यास्त तक) प्रभावी रह सकता है। इस दौरान आपको सात्विक रहना चाहिए। Thakur Prasad Calendar 2026 Makar Sankranti के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पुण्य काल के दौरान किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा) का सेवन वर्जित है। इस समय में मन में बुरे विचार न लाएं और किसी का अपमान न करें। पुण्य काल का सदुपयोग भगवत भजन, कीर्तन और गरीबों की सेवा में करना चाहिए। यदि आप नदी में स्नान करने में असमर्थ हैं, तो घर के पानी में थोड़ा सा गंगाजल और तिल मिलाकर स्नान करें, इससे भी तीर्थ स्नान का पुण्य मिलता है।
मकर संक्रांति पूजा विधि और सूर्य उपासना
मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) भगवान सूर्य नारायण को समर्पित पर्व है। इस दिन सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं, जिसका अर्थ है कि अब दिन बड़े और रातें छोटी होनी शुरू हो जाएंगी। देवताओं का दिन भी इसी तिथि से शुरू होता है। इसलिए, इस दिन सूर्य उपासना की विधि बहुत विशिष्ट और फलदायी होती है। सही विधि से पूजा करने पर यश, कीर्ति और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। यदि संभव हो तो पीले या लाल रंग के वस्त्र पहनें क्योंकि यह सूर्य देव को प्रिय हैं। इसके बाद तांबे के लोटे में जल लें। पूजा स्थान को साफ करें और एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर सूर्य देव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। अगर आपके पास प्रतिमा नहीं है, तो साक्षात सूर्य देव को ही अपना आराध्य मानकर खुले आकाश के नीचे पूजा करें। मकर संक्रांति 2026 कब है (Makar Sankranti 2026 Kab Hai), यह जानने के बाद सबसे महत्वपूर्ण है कि आप उस दिन सूर्य को कैसे प्रसन्न करते हैं।
सूर्य को अर्घ्य देने की सही विधि
सूर्य को अर्घ्य देना मकर संक्रांति की सबसे मुख्य रस्म है। एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरें। इसमें रोली (लाल चंदन), अक्षत (चावल), लाल फूल, और थोड़े से काले तिल और गुड़ डालें। मकर संक्रांति 2026 पर काले तिल का विशेष महत्व है। अब पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हो जाएं। दोनों हाथों से लोटे को सिर की ऊंचाई तक उठाएं और धीरे-धीरे जल की धारा प्रवाहित करें। जल की धारा के बीच से सूर्य देव के दर्शन करें। अर्घ्य देते समय ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ या ‘ॐ आदित्याय नमः’ मंत्र का जाप करते रहें। ध्यान रखें कि अर्घ्य का जल पैरों पर न गिरे, इसके लिए नीचे एक पात्र या गमला रख लें।
मकर संक्रांति के विशेष मंत्र
मंत्रों में अपार शक्ति होती है। Thakur Prasad Calendar 2026 Makar Sankranti के विशेष खंड में सूर्य मंत्रों के जाप पर जोर दिया गया है। अर्घ्य देने के बाद आप गायत्री मंत्र ‘ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्’ का 108 बार जाप कर सकते हैं। इसके अलावा, सूर्य के 12 नामों का उच्चारण करना भी बहुत शुभ माना जाता है – (मित्राय नमः, रवये नमः, सूर्याय नमः, भानवे नमः, खगाय नमः, पूष्णे नमः, हिरण्यगर्भाय नमः, मारीचाय नमः, आदित्याय नमः, सवित्रे नमः, अर्काय नमः, भास्कराय नमः)। इन मंत्रों के जाप से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
मकर संक्रांति पर दान का महत्व (खिचड़ी पर्व)
मकर संक्रांति को लोकभाषा में ‘खिचड़ी पर्व’ भी कहा जाता है। हिंदू धर्म में दान को सबसे बड़ा धर्म माना गया है, और मकर संक्रांति के दिन किया गया दान सीधे ईश्वर को प्राप्त होता है। 15 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) मनाते समय दान की तैयारी पहले से कर लें। ऐसी मान्यता है कि इस दिन दान करने से शनि देव और सूर्य देव दोनों की कृपा प्राप्त होती है।
दान केवल वस्तुओं का हस्तांतरण नहीं है, बल्कि यह आपके त्याग और समर्पण का प्रतीक है। जब आप अपनी कमाई का कुछ हिस्सा जरूरतमंदों को देते हैं, तो उससे आपके धन की शुद्धि होती है। मकर संक्रांति 2026 कब है (Makar Sankranti 2026 Kab Hai), यह प्रश्न जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण यह प्रश्न है कि “क्या दान करें?”। इस दिन मुख्य रूप से सीधा (कच्चा राशन), कंबल, और तिल-गुड़ का दान किया जाता है। ठाकुर प्रसाद पंचांग के अनुसार, अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना चाहिए, चाहे वह मुट्ठी भर तिल हो या स्वर्ण दान।
काले तिल और गुड़ का दान क्यों?
मकर संक्रांति पर काले तिल और गुड़ के दान के पीछे एक पौराणिक कथा और वैज्ञानिक कारण दोनों हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य देव अपने पुत्र शनि से मिलने उनके घर (मकर राशि) जाते हैं। शनि देव का प्रिय रंग काला है और तिल शनि का कारक है। वहीं गुड़ सूर्य का प्रतीक है। जब हम तिल और गुड़ (लड्डू के रूप में) का दान करते हैं या खाते हैं, तो हम सूर्य और शनि के मिलन का उत्सव मनाते हैं। इससे कुंडली में शनि दोष, साढ़े साती और ढैय्या के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। Thakur Prasad Calendar 2026 Makar Sankranti में भी तिल दान को पाप नाशक बताया गया है।
खिचड़ी दान और सेवन की परंपरा
मकर संक्रांति को ‘खिचड़ी’ कहने का कारण यह है कि इस दिन चावल और उड़द की दाल की खिचड़ी खाने और दान करने का विधान है। चावल को चंद्रमा का कारक और उड़द की दाल को शनि का कारक माना जाता है। हल्दी (गुरु), नमक (शुक्र) और हरी सब्जियां (बुध) मिलकर जब खिचड़ी बनती है, तो यह सभी नवग्रहों को शांत करती है। 15 जनवरी 2026 को अपने घर में खिचड़ी जरूर बनाएं और सबसे पहले इसे भगवान को भोग लगाएं। इसके बाद ब्राह्मणों और गरीबों को खिचड़ी, घी और पापड़ का दान करें। उत्तर प्रदेश और बिहार में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
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मकर संक्रांति का वैज्ञानिक और स्वास्थ्य महत्व
सनातन धर्म के हर त्योहार के पीछे एक गहरा विज्ञान छिपा होता है। मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) केवल आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य और प्रकृति के विज्ञान से जुड़ा पर्व है। जब लोग पूछते हैं कि मकर संक्रांति 2026 कब है (Makar Sankranti 2026 Kab Hai), तो वे अनजाने में उस दिन के बारे में पूछ रहे होते हैं जब पृथ्वी पर सूर्य की किरणें सीधी पड़नी शुरू होती हैं। उत्तरायण के समय सूर्य की किरणें भारतवर्ष पर प्रखर होने लगती हैं, जिससे शीत ऋतु का प्रभाव कम होने लगता है और वसंत का आगमन होता है।
इस समय मौसम में बदलाव होता है, और शरीर को इस बदलाव के लिए तैयार करना जरूरी होता है। मकर संक्रांति के रीति-रिवाज, जैसे नदी स्नान और विशिष्ट भोजन, हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। प्राचीन ऋषियों ने इस त्योहार को इस तरह डिज़ाइन किया है कि यह मानसिक और शारीरिक दोनों स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो।
शीत ऋतु और शरीर की ऊर्जा
सर्दियों में हमारे शरीर का तापमान कम हो जाता है और पाचन अग्नि मंद पड़ जाती है। मकर संक्रांति के समय खाई जाने वाली चीजें जैसे तिल, गुड़, मूंगफली और खिचड़ी शरीर को अंदर से गर्म रखती हैं। तिल में तेल होता है जो शरीर को चिकनाई देता है और रूखेपन से बचाता है। गुड़ आयरन का स्रोत है जो खून बढ़ाता है और शरीर को ऊर्जा देता है। Thakur Prasad Calendar 2026 Makar Sankranti में भी आयुर्वेद के हवाले से बताया गया है कि इस दिन उपवास और कल्पवास करने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं।
सूर्य की किरणों का महत्व
मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा का भी एक वैज्ञानिक पहलू है। जब लोग छतों पर या खुले मैदानों में पतंग उड़ाते हैं, तो वे स्वाभाविक रूप से सूर्य की रोशनी में समय बिताते हैं। सर्दी के दिनों में शरीर को धूप की बहुत आवश्यकता होती है। सूर्य की किरणों से हमें विटामिन डी मिलता है, जो हड्डियों के लिए जरूरी है और कई प्रकार के चर्म रोगों को नष्ट करता है। 15 जनवरी को सूर्य उत्तरायण होते हैं, जिससे उनसे निकलने वाली ऊर्जा अधिक सकारात्मक और प्रभावशाली होती है। इसलिए इस दिन सूर्य स्नान करना बहुत फायदेमंद है।
मकर संक्रांति 2026: 12 राशियों पर प्रभाव
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश सभी 12 राशियों को प्रभावित करेगा। मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) का यह विशेष गोचर 14 जनवरी 2026 को रात 09:19 बजे हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य राजा बनकर राशि बदलते हैं, तो प्रजा पर इसका गहरा असर पड़ता है।
चूँकि सूर्य का राशि परिवर्तन रात में हो रहा है और पुण्य काल 15 जनवरी को दोपहर 01:24 बजे तक रहेगा, इसलिए सभी राशियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने आराध्य की पूजा और दान इसी समय सीमा (15 जनवरी की सुबह से दोपहर 1:24 तक) के भीतर करें। आइए जानते हैं कि Thakur Prasad Calendar 2026 Makar Sankranti के अनुसार यह समय आपके लिए कैसा रहेगा।
यह गोचर विशेष रूप से मेष, सिंह, और धनु राशि वालों के लिए बहुत शुभ रहने वाला है।
मेष, वृषभ, मिथुन और कर्क राशि
- मेष (Aries): 14 जनवरी की रात से सूर्य आपके दशम भाव में प्रवेश करेंगे। यह करियर के लिए स्वर्णिम समय है। नई नौकरी या पदोन्नति मिल सकती है। 15 जनवरी की सुबह सूर्य को अर्घ्य जरूर दें।
- वृषभ (Taurus): भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। धार्मिक कार्यों में रूचि बढ़ेगी। मकर संक्रांति 2026 कब है (Makar Sankranti 2026 Kab Hai) की चिंता छोड़ें और पुण्य काल (15 जनवरी, दोपहर 01:24 तक) के दौरान पिता के चरण स्पर्श करें और तिल का दान करें, लाभ होगा।
- मिथुन (Gemini): स्वास्थ्य का ध्यान रखें। अष्टम भाव का सूर्य पेट की समस्या दे सकता है। 14 की रात से ही गरिष्ठ भोजन से बचें और 15 तारीख को वाहन सावधानी से चलाएं।
- कर्क (Cancer): जीवनसाथी के साथ मतभेद हो सकते हैं। व्यापार में साझेदारी से लाभ होगा लेकिन क्रोध पर नियंत्रण रखें। पुण्य काल में चावल और मिश्री का दान शुभ रहेगा।
सिंह, कन्या, तुला और वृश्चिक राशि
- सिंह (Leo): आपके स्वामी सूर्य हैं, जो 14 जनवरी की रात 09:19 बजे से मजबूत स्थिति में आ जाएंगे। शत्रु परास्त होंगे और कोर्ट-कचहरी में विजय मिलेगी। पुराना रोग ठीक होगा।
- कन्या (Virgo): विद्यार्थियों के लिए समय अच्छा है। संतान पक्ष से शुभ समाचार मिलेगा। आप अपनी बुद्धि और विवेक का सही इस्तेमाल कर पाएंगे। 15 जनवरी को दोपहर 01:24 से पहले मूंग की दाल की खिचड़ी दान करें।
- तुला (Libra): माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। सुख-सुविधाओं पर खर्च बढ़ सकता है। घर में कोई नया वाहन आ सकता है। सूर्य देव की उपासना करें।
- वृश्चिक (Scorpio): पराक्रम में वृद्धि होगी। छोटे भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा। यात्रा के योग बन रहे हैं जो लाभकारी सिद्ध होंगे। 15 तारीख को गुड़ का दान करें।
धनु, मकर, कुम्भ और मीन राशि
- धनु (Sagittarius): धन भाव में सूर्य का आना आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा। वाणी में ओज आएगा, लेकिन कड़वा बोलने से बचें। पुण्य काल के समय (15 जनवरी) पीला वस्त्र या हल्दी दान करना शुभ होगा।
- मकर (Capricorn): सूर्य 14 जनवरी को रात 09:19 बजे आपकी ही राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इससे आत्मविश्वास तो बढ़ेगा लेकिन सिरदर्द या आंखों की समस्या हो सकती है। अहंकार से बचें।
- कुम्भ (Aquarius): खर्चों में बढ़ोतरी होगी। विदेश जाने के योग बन सकते हैं। कोर्ट-कचहरी से दूर रहें। आपके लिए 15 जनवरी को दोपहर 01:24 बजे तक दान-पुण्य करना सबसे ज्यादा जरुरी है।
- मीन (Pisces): आय के नए स्रोत बनेंगे। बड़े भाई या वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। यह समय इच्छा पूर्ति का है। 15 तारीख की सुबह सूर्य नमस्कार करें।
काशी (वाराणसी) में मकर संक्रांति की धूम
चूँकि हमारी वेबसाइट Thakur Prasad वाराणसी से संचालित होती है, इसलिए काशी की संक्रांति का जिक्र किए बिना यह लेख अधूरा है। काशी में मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) का नजारा देखने लायक होगा। यहाँ की संक्रांति केवल स्नान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक उत्सव है। 15 जनवरी को गंगा के सभी 84 घाटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ेगा। दशाश्वमेध घाट और अस्सी घाट पर विशेष गंगा आरती का आयोजन किया जाएगा।
काशी में ‘खिचड़ी बाबा’ का प्रसाद बहुत प्रसिद्ध है। यहाँ लोग एक-दूसरे के घर खिचड़ी और तिल के लड्डू भेजते हैं। अगर आप वाराणसी में हैं या आने का प्लान कर रहे हैं, तो 15 जनवरी 2026 को यहाँ का माहौल आपको मंत्रमुग्ध कर देगा।
गंगा स्नान और विश्वनाथ दर्शन
काशी में मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा में डुबकी लगाने से मोक्ष के द्वार खुलते हैं। लोग ब्रह्म मुहूर्त में ही ‘हर हर गंगे’ का उद्घोष करते हुए पवित्र स्नान करते हैं। स्नान के बाद बाबा विश्वनाथ के दर्शन करना अनिवार्य माना जाता है। Thakur Prasad Calendar 2026 Makar Sankranti में काशी वासियों के लिए विशेष मुहूर्त दिए गए हैं। स्नान के बाद घाटों पर बैठे भिक्षुओं को दान देना यहाँ की पुरानी परंपरा है। इस दिन अन्नपूर्णा मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ होती है।
पतंगबाजी का अद्भुत नजारा
वाराणसी में मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का जो उत्साह देखने को मिलता है, वह पूरे भारत में अद्वितीय है। गंगा के उस पार और छतों पर हजारों रंग-बिरंगी पतंगें आसमान को ढक लेती हैं। ‘काटा है!’ का शोर और डीजे की धुन पर थिरकते लोग इस पर्व को जीवंत बना देते हैं। यह परंपरा सामाजिक सौहार्द को बढ़ाती है। लोग अपनी छतों पर ही बाटी-चोखा और खिचड़ी बनाते हैं और परिवार के साथ पूरा दिन धूप में बिताते हैं।
निष्कर्ष
अंत में, हम यही कहेंगे कि असमंजस को दूर करें। ज्योतिषीय गणनाओं, ग्रह गोचर और Thakur Prasad Calendar 2026 Makar Sankranti की प्रामाणिकता के आधार पर मकर संक्रांति 15 जनवरी 2026 को मनाना ही शास्त्र सम्मत और श्रेष्ठ है। यह पर्व हमें अंधकार से प्रकाश की ओर (तमसो मा ज्योतिर्गमय) ले जाने वाला है।
15 जनवरी को स्नान करें, सूर्य देव को अर्घ्य दें, और अपनी क्षमता अनुसार तिल, गुड़ और खिचड़ी का दान करें। हमें उम्मीद है कि हमारे इस लेख ने आपके सवाल “मकर संक्रांति 2026 कब है (Makar Sankranti 2026 Kab Hai)” का विस्तृत उत्तर दे दिया है। ठाकुर प्रसाद परिवार की ओर से आप सभी को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं! भगवान सूर्य आपके जीवन में नई ऊर्जा, तेज और सफलता लेकर आएं।
जय सूर्य देव! जय काशी विश्वनाथ!
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को है या 15 जनवरी को?
ठाकुर प्रसाद कैलेंडर और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, मकर संक्रांति 15 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दिन में हो रहा है।
ठाकुर प्रसाद कैलेंडर 2026 के अनुसार मकर संक्रांति कब है?
ठाकुर प्रसाद पंचांग (काशी) के अनुसार मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी 2026 को मनाना शास्त्र सम्मत और शुभ है।
मकर संक्रांति 2026 का पुण्य काल समय क्या है?
ठाकुर प्रसाद पंचांग के अनुसार, पुण्य काल 14 जनवरी 2026 की रात 09:19 बजे से शुरू होकर 15 जनवरी 2026 को दोपहर 01:24 बजे तक रहेगा। चूँकि रात में स्नान नहीं किया जाता, इसलिए व्यावहारिक रूप से 15 जनवरी को सूर्योदय से लेकर दोपहर 01:24 बजे तक का समय स्नान और दान के लिए सर्वश्रेष्ठ (महा पुण्य काल) माना जाएगा।
मकर संक्रांति पर स्नान-दान का शुभ मुहूर्त क्या है?
स्नान और दान के लिए सबसे उत्तम समय 15 जनवरी की सुबह (ब्रह्म मुहूर्त) से दोपहर 01:24 बजे तक रहेगा।
सूर्य को अर्घ्य देने की सही विधि क्या है?
तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, रोली, गुड़ और काले तिल मिलाकर ‘ॐ आदित्याय नमः’ मंत्र के साथ सूर्य को अर्घ्य दें।
मकर संक्रांति पर किन चीजों का दान करना चाहिए?
इस दिन तिल, गुड़, कंबल (ऊनी वस्त्र), खिचड़ी (कच्चा सीधा) और घी का दान करना सबसे उत्तम माना गया है।
मकर संक्रांति पर काले तिल का दान क्यों करते हैं?
काला तिल शनि देव का कारक है। इसे दान करने से शनि की साढ़े साती और ढैय्या का प्रकोप कम होता है और सूर्य-शनि की कृपा मिलती है।
क्या मकर संक्रांति के बाद शादी-विवाह शुरू हो जाते हैं?
जी हाँ, मकर संक्रांति के साथ ही खरमास (मलमास) समाप्त हो जाता है और 15 जनवरी के बाद से विवाह, मुंडन जैसे सभी शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे।
वाराणसी (काशी) में मकर संक्रांति कैसे मनाई जाती है?
काशी में लाखों लोग गंगा घाटों पर स्नान करते हैं, बाबा विश्वनाथ के दर्शन करते हैं और छतों पर पतंगबाजी का भव्य आयोजन होता है।
मकर संक्रांति 2026 से किन राशियों की किस्मत चमकेगी?
सूर्य का यह गोचर विशेष रूप से मेष, सिंह, और धनु राशि वालों के लिए धन लाभ और तरक्की लेकर आ रहा है।
मकर संक्रांति पर खिचड़ी क्यों खाई जाती है?
चावल (चंद्रमा), दाल (शनि), हल्दी (गुरु) और हरी सब्जियों (बुध) से बनी खिचड़ी खाने से कुंडली के सभी ग्रह दोष दूर होते हैं और स्वास्थ्य अच्छा रहता है।
