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Diwali 2026 Date: दिवाली कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पूरी जानकारी

दिवाली का नाम आते ही घर की सफाई, मिठाइयों की खुशबू और दीयों की कतार याद आने लगती है। हर साल की तरह इस बार भी सबसे पहला सवाल यही है कि Diwali 2026 date क्या है और लक्ष्मी पूजा किस समय करना ठीक रहेगा। पंचांग के अनुसार इस साल मुख्य दिवाली रविवार, 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। धनतेरस इससे दो दिन पहले, यानी 6 नवंबर को पड़ रही है और भाई दूज 11 नवंबर को है। इस लेख में हमने तारीखें, शुभ मुहूर्त, पूजा की विधि और पाँचों दिनों की जानकारी एक ही जगह रखी है, ताकि आपको अलग-अलग वेबसाइट खोलने की ज़रूरत न पड़े।

Diwali 2026 Kab Hai? सही तारीख और तिथि की पूरी जानकारी

अगर आप खोज रहे हैं कि Diwali 2026 kab hai, तो सीधा जवाब है: दिवाली 8 नवंबर 2026, रविवार को है। दिवाली हमेशा कार्तिक मास की अमावस्या की रात को मनाई जाती है। इस साल अमावस्या तिथि 8 नवंबर को लगभग सुबह 11:27 बजे शुरू होगी और 9 नवंबर को दोपहर करीब 12:31 बजे तक रहेगी। क्योंकि लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल, यानी सूर्यास्त के बाद के समय में की जाती है, और 8 नवंबर की शाम को अमावस्या मौजूद है, इसलिए लक्ष्मी-गणेश पूजा उसी दिन होगी। 9 नवंबर की शाम तक अमावस्या समाप्त हो चुकी होगी, इसलिए उस दिन दिवाली मनाना शास्त्र के अनुसार सही नहीं माना जाता। यानी पूरे देश में दिवाली 8 नवंबर 2026 को ही मनाई जाएगी।

अमावस्या तिथि और प्रदोष काल का नियम

दिवाली की तारीख तय करने का नियम सीधा है। जिस दिन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में अमावस्या मौजूद हो, उसी दिन लक्ष्मी पूजा होती है। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटे 24 मिनट का समय माना जाता है, और उसी के भीतर शुभ मुहूर्त चुना जाता है। 2026 में 8 नवंबर की शाम को अमावस्या मौजूद है, जबकि 9 नवंबर की शाम तक वह समाप्त हो चुकी होगी। इसलिए दिवाली 8 नवंबर 2026 को ही मानी जाएगी।

जब अमावस्या दो दिन प्रदोष को छूती है, तब पंचांग के नियम के अनुसार निर्णय लिया जाता है और ऐसे में पंडितों की राय अलग-अलग दिख सकती है, पर इस साल ऐसी कोई उलझन नहीं है। बंगाल और पूर्वी भारत में इसी रात काली पूजा भी होती है, जो निशीथ काल यानी आधी रात के आसपास की जाती है।

दिवाली की तारीख हर साल क्यों बदलती है?

हमारे त्योहार चंद्रमा की चाल यानी तिथियों पर चलते हैं, जबकि अंग्रेज़ी कैलेंडर सूर्य पर आधारित है। चंद्र वर्ष लगभग 354 दिन का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 दिन से कुछ ज़्यादा का। यही करीब 11 दिन का फर्क हर साल तिथियों को अंग्रेज़ी तारीखों में आगे-पीछे कर देता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग हर तीन साल में अधिक मास जोड़ा जाता है, जिससे त्योहार अपने मौसम के आसपास बने रहते हैं। इसी कारण दिवाली हमेशा अक्टूबर या नवंबर में आती है। इसलिए हर साल तारीख बदलना बिल्कुल सामान्य है, यह पंचांग की गणना का हिस्सा है।

Diwali 2026 Shubh Muhurat और Lakshmi Puja 2026 Date and Time

लक्ष्मी-गणेश पूजा का सबसे शुभ समय प्रदोष काल में माना गया है। ठाकुर प्रसाद पंचांग, वाराणसी सूची के अनुसार 8 नवंबर 2026 को Lakshmi Puja 2026 का मुहूर्त शाम 5:37 बजे से 7:34 बजे तक रहेगा, यानी कुल 1 घंटा 57 मिनट। यही Diwali 2026 shubh muhurat है, जिसमें आप आराम से कलश स्थापना, पूजन और आरती पूरी कर सकते हैं।

ध्यान रखें कि मुहूर्त का समय हर शहर में थोड़ा बदल जाता है, क्योंकि सूर्यास्त का समय जगह के हिसाब से अलग होता है। उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे पूर्वी इलाकों में सूर्यास्त दिल्ली से कुछ मिनट पहले हो जाता है, इसलिए वहाँ मुहूर्त भी उतना ही पहले शुरू होगा। अपने शहर का सटीक समय किसी भरोसेमंद पंचांग या अपने पंडित जी से ज़रूर मिला लें।

वृषभ लग्न और स्थिर लग्न का महत्व

कई पंडित प्रदोष काल के साथ स्थिर लग्न में पूजा करने की सलाह देते हैं। वृषभ लग्न को स्थिर माना जाता है, इसलिए मान्यता है कि इसमें की गई पूजा से लक्ष्मी जी का वास घर में टिकता है। अगर आपके परिवार में यह परंपरा है, तो पंचांग में वृषभ लग्न का समय देखकर उसी के भीतर मुख्य पूजन रखें। जिन घरों में ऐसी कोई विशेष परंपरा नहीं है, वे प्रदोष काल के भीतर कभी भी पूजा कर सकते हैं।

कुबेर जी की पूजा का मुहूर्त

कुबेर जी को धन का रक्षक माना जाता है। दिवाली की रात लक्ष्मी-गणेश के साथ कुबेर जी की पूजा भी उसी प्रदोष मुहूर्त में की जाती है। अलग से Kuber ji puja muhurat धनतेरस की शाम का माना जाता है, जो 6 नवंबर 2026 को वाराणसी में शाम 6:02 से 7:57 बजे के बीच है। व्यापारी वर्ग दिवाली की रात चोपड़ा पूजन में भी बही-खातों के साथ कुबेर जी का स्मरण करता है।

अपने शहर का मुहूर्त कैसे पता करें

अपने शहर का सही Diwali 2026 shubh muhurat जानने का सबसे आसान तरीका है ठाकुर प्रसाद पंचांग देखना। इसमें अपने शहर के अनुसार सूर्यास्त और प्रदोष काल का समय देखकर आप Lakshmi Puja 2026 date and time तय कर सकते हैं। तरीका सीधा है: पहले 8 नवंबर 2026 की तिथि खोलें, फिर अपने शहर का सूर्यास्त देखें, और उसके बाद प्रदोष काल व स्थिर लग्न के भीतर पूजा का समय चुनें। अलग-अलग पंचांगों में मिनटों का अंतर इसलिए दिखता है कि हर पंचांग की गणना पद्धति और स्थान का आधार अलग होता है। इसलिए ऊपर दिए गए समय को केवल संदर्भ मानें, और अपने शहर के लिए ठाकुर प्रसाद पंचांग तथा परिवार के पंडित जी की सलाह को अंतिम रखें।

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Diwali 2026 Date: दिवाली कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पूरी जानकारी
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Diwali 2026 Date: दिवाली कब है? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पूरी जानकारी

Diwali 2026 Puja Vidhi: घर पर लक्ष्मी-गणेश पूजा कैसे करें

दिवाली की पूजा के लिए बहुत भारी इंतज़ाम की ज़रूरत नहीं होती। सच्ची श्रद्धा, साफ-सुथरा घर और सही क्रम काफी है। Diwali 2026 puja vidhi की शुरुआत शाम से पहले घर की सफाई और मुख्य द्वार पर रंगोली से होती है। पूजा स्थान पर उत्तर-पूर्व दिशा में चौकी रखें, उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ और लक्ष्मी जी व गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। गणेश जी को लक्ष्मी जी के बाईं ओर रखा जाता है। दीपक घी या सरसों के तेल का जलाएँ और पूजा शुरू करने से पहले शुद्ध वस्त्र पहनकर हाथ में जल लेकर संकल्प करें। इसके बाद क्रम से गणेश पूजन, कलश पूजन, लक्ष्मी पूजन और आरती करें।

पूजा सामग्री की सूची

रोली, मौली, चावल, हल्दी, कुमकुम, गंगाजल, कलश, आम के पत्ते, नारियल, सुपारी, लौंग-इलायची, कमल या गेंदे के फूल, खील-बताशे, मिठाई, फल, पान, धूप-दीप, कपूर और सिक्के। इसके अलावा चाँदी का सिक्का या गहना, और व्यापारियों के लिए बही-खाता व कलम भी रखी जाती है। सामग्री पहले से निकालकर थाली में सजा लें, ताकि मुहूर्त के बीच में उठना न पड़े।

चरण-दर-चरण पूजन विधि

पहले गणेश जी का आवाहन कर उन्हें अक्षत, फूल और दूर्वा चढ़ाएँ। फिर कलश में जल, सिक्का और आम के पत्ते रखकर उस पर नारियल स्थापित करें। इसके बाद लक्ष्मी जी को स्नान के प्रतीक रूप में गंगाजल छिड़कें, तिलक लगाएँ, वस्त्र और फूल अर्पित करें। खील-बताशे और मिठाई का भोग लगाएँ। “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद” मंत्र का जाप करें और अंत में परिवार के साथ आरती करें। पूजा के बाद घर के हर कोने और तुलसी के पास दीप रखें।

पूजा में इन बातों का ध्यान रखें

पूजा के समय मन शांत रखें और फोन से दूरी बनाएँ। टूटी या खंडित मूर्ति की पूजा न करें। लक्ष्मी जी को तुलसी दल अर्पित नहीं किया जाता। बच्चों को पटाखों से सुरक्षित रखें और दीपक ऐसी जगह रखें जहाँ पर्दे या कपड़े न हों। प्रसाद सबमें बाँटें और ज़रूरतमंदों को भी मिठाई या दीप भेंट करें, क्योंकि दिवाली का असली अर्थ साझा करने में ही है।

लक्ष्मी जी और कुबेर जी को प्रसन्न करने के मंत्र

धनतेरस और दिवाली की पूजा में मंत्र जाप का विशेष महत्व माना गया है। माता लक्ष्मी के लिए सरल मंत्र है “ॐ महालक्ष्म्यै नमः”, और बीज मंत्र है “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”। कुबेर जी के लिए “ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा” मंत्र का जाप किया जाता है।

मान्यता है कि पूजा के शुभ मुहूर्त में इन्हें 108 बार, यानी एक माला, श्रद्धा और शांत मन से जपना चाहिए। जाप से पहले दीपक जलाएँ, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुँह करके बैठें और उच्चारण साफ रखें। अगर संस्कृत उच्चारण कठिन लगे, तो “ॐ महालक्ष्म्यै नमः” जैसा छोटा मंत्र भी भाव से जपा जा सकता है। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पंडित जी से मंत्र की पुष्टि कर लें।

Dhanteras 2026 Date और Shubh Muhurat

पाँच दिन के दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। Dhanteras 2026 date शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 है। यह कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर पड़ता है, जो 6 नवंबर को सुबह लगभग 10:30 बजे लगेगी और 7 नवंबर को सुबह करीब 10:47 बजे तक रहेगी। ठाकुर प्रसाद पंचांग के अनुसार नई दिल्ली में Dhanteras 2026 shubh muhurat यानी लक्ष्मी-कुबेर पूजा का समय शाम 6:02 से 7:57 बजे तक है।

कुछ वेबसाइटें इसी दिन के लिए 6:17 से 8:15 बजे का समय भी दिखाती हैं। यह अंतर अलग गणना पद्धति या शहर के कारण होता है, इसलिए अपने शहर का समय देखकर ही पूजा तय करें। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा होती है।

धनतेरस पर खरीदारी का सही समय

मान्यता है कि त्रयोदशी तिथि के दौरान सोना, चाँदी, बर्तन या झाड़ू खरीदना शुभ होता है। चूँकि इस बार त्रयोदशी 6 नवंबर की सुबह 10:30 बजे से शुरू हो रही है, इसलिए खरीदारी दोपहर और शाम दोनों समय की जा सकती है। अगर 6 नवंबर को समय न मिले, तो 7 नवंबर की सुबह 10:47 बजे से पहले तक भी त्रयोदशी रहेगी। जल्दबाज़ी में महँगी चीज़ें खरीदने की ज़रूरत नहीं है, एक छोटा चाँदी का सिक्का या नया बर्तन भी परंपरा पूरी कर देता है।

यम दीपदान की परंपरा

धनतेरस की शाम घर के बाहर दक्षिण दिशा में एक दीपक जलाने की परंपरा है, जिसे यम दीपदान कहते हैं। माना जाता है कि इससे परिवार में अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इसके लिए आटे का चौमुखा दीया बनाकर सरसों के तेल से जलाया जाता है। यह सरल परंपरा हमें याद दिलाती है कि धन से पहले स्वास्थ्य और सुरक्षित जीवन ज़रूरी है।

Choti Diwali 2026 Date: नरक चतुर्दशी कब है?

लोग अक्सर पूछते हैं कि Choti Diwali 2026 date कौन सी है, क्योंकि इस साल दो तारीखें सुनने को मिल रही हैं। असल में चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर की सुबह से शुरू होकर 8 नवंबर की सुबह तक रहती है। इसी वजह से कई पंचांग 7 नवंबर, शनिवार की शाम को छोटी दिवाली के दीप जलाने की सलाह देते हैं, जबकि ठाकुर प्रसाद पंचांग के अनुसार सूर्योदय के समय चतुर्दशी होने से अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की सुबह किया जाता है।

आम तौर पर घरों में छोटी दिवाली की शाम 7 नवंबर को दीपक जलाकर मनाई जाती है और 8 नवंबर की सुबह तेल-उबटन से स्नान किया जाता है। पंचांग में अंतर दिखे तो अपने स्थानीय पंडित जी से पूछ लें।

नरक चतुर्दशी की कथा

नरकासुर प्रागज्योतिषपुर का शक्तिशाली राजा था, जिसे वरदान था कि उसकी मृत्यु केवल अपनी माता के हाथों होगी। अहंकार में उसने देवताओं को सताया और मान्यता के अनुसार 16,100 कन्याओं को बंदी बना लिया। तब भगवान श्रीकृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ युद्ध में उतरे। सत्यभामा को पृथ्वी माता का अंश माना जाता है, इसलिए उन्हीं के बाण से नरकासुर का अंत हुआ।

कन्याएँ मुक्त हुईं और चारों ओर दीप जलाकर खुशी मनाई गई। इसी कारण नरक चतुर्दशी को बुराई पर अच्छाई की जीत का दिन माना जाता है। दक्षिण भारत में इसी दिन सूर्योदय से पहले तेल स्नान कर दीपावली की मुख्य सुबह मनाई जाती है।

रूप चौदस और अभ्यंग स्नान

उत्तर भारत में नरक चतुर्दशी को रूप चौदस भी कहते हैं। इस दिन सूर्योदय से पहले उबटन लगाकर तिल के तेल से स्नान करने की परंपरा है, जिसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है। उबटन आम तौर पर बेसन, हल्दी, चंदन और दही या मलाई से बनता है। मान्यता है कि इससे शरीर निखरता है और थकान व आलस्य दूर होता है। इस साल अभ्यंग स्नान का दिन 8 नवंबर की सुबह माना गया है।

शाम को घर के मुख्य द्वार, आँगन, रसोई और तुलसी के पास दीपक रखे जाते हैं, ताकि हर कोना रोशन रहे। गुजरात और राजस्थान जैसे कई इलाकों में इस दिन काली चौदस के रूप में हनुमान जी या माँ काली की पूजा भी होती है।

Govardhan Puja 2026 Date, Annakut 2026 Date और Govardhan Puja Kab Hai

दिवाली के अगले दिन की पूजा को लेकर सबसे ज़्यादा उलझन रहती है, इसलिए पहले साफ कर दें: Govardhan Puja 2026 date मंगलवार, 10 नवंबर 2026 है। यह कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को पड़ती है। जो लोग पूछते हैं कि Govardhan puja kab hai, उन्हें याद रखना चाहिए कि 9 नवंबर को सुबह तक अमावस्या रहेगी और उस दिन कोई अलग त्योहार नहीं है।

Annakut 2026 date भी यही 10 नवंबर है, क्योंकि अन्नकूट गोवर्धन पूजा का ही हिस्सा है। प्रतिपदा तिथि 10 नवंबर को दोपहर करीब 2:00 बजे तक रहेगी, इसलिए पूजा सुबह के समय करना बेहतर रहता है। एक पंचांग-आधारित गाइड के अनुसार नई दिल्ली में प्रातःकाल का समय सुबह 6:40 से 8:50 बजे के बीच बताया गया है। कुछ कैलेंडर में यह त्योहार एक दिन आगे-पीछे दिखता है, इसलिए पंचांग मिलान कर लें।

गोवर्धन पूजा की कथा

ब्रज के लोग हर साल अच्छी बारिश की आस में इंद्र देव की पूजा करते थे। बालक कृष्ण ने नंद बाबा और गोपों से पूछा कि असली पालन-पोषण तो गोवर्धन पर्वत, गायों और खेतों से होता है, फिर पूजा उसी की क्यों न हो। गाँव वालों ने बात मान ली और इंद्र की जगह गोवर्धन की पूजा की। इससे इंद्र क्रोधित हो गए और ब्रज पर मूसलाधार बारिश बरसा दी। मान्यता है कि सात दिन और सात रात तक वर्षा होती रही।

तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उँगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सारे गोप-गोपियाँ, बच्चे और गायें उसके नीचे सुरक्षित रहे। अंत में इंद्र का अहंकार टूटा और उन्होंने क्षमा माँगी। यह कथा प्रकृति, पशुधन और अहंकार से दूर रहने का संदेश देती है।

अन्नकूट और गोवर्धन पूजा की विधि

सुबह स्नान के बाद आँगन या पूजा स्थान पर गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है। कई घरों में उसके साथ श्रीकृष्ण, ग्वाल-बाल और गायों की छोटी आकृतियाँ भी बनती हैं। इसे फूल, दीपक, खील-बताशे और रंगोली से सजाया जाता है। फिर रोली, चावल, धूप-दीप से पूजन कर अन्नकूट का भोग लगाया जाता है, जिसमें अनाज, कढ़ी-चावल, कई तरह की सब्ज़ियाँ, पूड़ी और मिठाइयाँ होती हैं।

मंदिरों में 56 भोग की परंपरा भी है। इसके बाद गायों को नहलाकर तिलक लगाएँ और उन्हें गुड़ या हरा चारा खिलाएँ। अंत में गोवर्धन की परिक्रमा कर आरती उतारें और प्रसाद सबमें बाँट दें। पूजा सुबह करना बेहतर है, क्योंकि प्रतिपदा तिथि दोपहर लगभग 2:00 बजे तक रहेगी।

Bhai Dooj 2026 Date: भाई दूज का शुभ समय और तिलक विधि

दीपोत्सव का पाँचवाँ दिन भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित है। Bhai Dooj 2026 date बुधवार, 11 नवंबर 2026 है, जो कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि पर पड़ती है। यह दिवाली के तीन दिन बाद आता है। एक पंचांग-आधारित गाइड के अनुसार तिलक का शुभ समय अपराह्न में दोपहर करीब 1:10 से 3:20 बजे तक है, इसलिए बहनें इसी बीच भाई को तिलक लगाएँ तो अच्छा रहेगा। इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। उत्तर भारत में इसे भाई दूज, महाराष्ट्र में भाऊबीज और बंगाल में भाई फोटा कहते हैं। नाम अलग हैं, पर भावना एक ही है कि बहन भाई की लंबी उम्र और सुख की कामना करती है।

यम और यमुना की कथा

मान्यता है कि सूर्य देव की संतानें यमराज और यमुना भाई-बहन थे। यमुना उन्हें बार-बार अपने घर बुलाती थीं, पर कामकाज में व्यस्त यमराज नहीं जा पाते थे। एक दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को वे बहन के घर पहुँचे।

यमुना ने उनका स्वागत किया, माथे पर तिलक लगाया, आरती उतारी और स्नेह से भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा और भोजन करेगा, उसे यम का भय नहीं रहेगा। इसी कारण इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। तभी से यह परंपरा चली आ रही है और भाई-बहन के अटूट स्नेह का प्रतीक मानी जाती है।

भाई दूज पर तिलक कैसे करें

बहन पूजा की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मौली, मिठाई और नारियल सजाती है। भाई को पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करके बैठाया जाता है। पहले बहन दीपक से आरती उतारती है, फिर माथे पर रोली-चावल का तिलक लगाकर कलाई पर मौली बाँधती है और मुँह मीठा कराती है। इसके बाद वह भाई की पसंद का भोजन परोसती है। भाई बहन के पैर छूकर आशीर्वाद लेता है और उसे उपहार देता है।

तिलक का शुभ समय दोपहर करीब 1:10 से 3:20 बजे बताया गया है। अगर भाई दूर रहता है, तो वीडियो कॉल पर तिलक की रस्म निभाकर और मिठाई या उपहार भेजकर भी भावना पूरी की जा सकती है।

Diwali और Dhanteras 2026 पर क्या करें और क्या न करें

धनतेरस और दिवाली, दोनों दिन परंपरा के साथ-साथ थोड़े अनुशासन के भी हैं। कई घरों में बड़े-बुज़ुर्ग सालों से कुछ नियम निभाते आए हैं, जिनका उद्देश्य घर में शुद्धता, शांति और सकारात्मक माहौल बनाए रखना है।

इस साल धनतेरस 6 नवंबर और दिवाली 8 नवंबर को है, इसलिए तैयारी पहले से शुरू कर दें। सफाई, पूजा की सामग्री और खरीदारी की सूची समय रहते बना लें, ताकि मुहूर्त के समय जल्दबाज़ी न हो। नीचे दी गई बातें ज़्यादातर पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसलिए अपने परिवार और पंडित जी की परंपरा को भी ज़रूर मानें।

धनतेरस और दिवाली पर क्या करें-

  • पूजा से पहले पूरे घर की अच्छी तरह सफाई करें। नमक मिले पानी से पोछा लगाएँ और मुख्य द्वार पर रंगोली व दीपक सजाएँ।
  • धनतेरस पर त्रयोदशी तिथि में चाँदी, बर्तन या अपनी क्षमता के अनुसार कोई शुभ वस्तु खरीदें।
  • शाम को शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी, कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा करें।
  • धनतेरस की शाम घर के बाहर यम दीपदान करें।
  • दिवाली पर प्रदोष काल में स्वच्छ वस्त्र पहनकर लक्ष्मी-गणेश पूजन करें।
  • मिठाई, दीपक या ज़रूरी सामान ज़रूरतमंदों में बाँटें।
  • पटाखे जलाये तो सुरक्षित दूरी रखें और बच्चों पर नज़र रखें।

धनतेरस और दिवाली पर क्या न करें-

  • पूजा के समय टूटी या खंडित मूर्ति की पूजा न करें।
  • कई परंपराओं में धनतेरस पर उधार या कर्ज़ लेकर खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है।
  • घर में गंदगी, अँधेरा या अव्यवस्था न रखें, खासकर प्रवेश द्वार पर।
  • पूजा और त्योहार के दिनों में झगड़ा, कटु वचन या अपशब्द से बचें।
  • जुआ, शराब और मांसाहार जैसी चीज़ों से दूरी रखें।
  • पूजा के बीच फोन में उलझे न रहें और मुहूर्त का समय न चूकें।
  • ज़्यादा पटाखे जलाकर प्रदूषण न फैलाएँ और पशु-पक्षियों को परेशान न करें।

5 दिन की Diwali 2026 तारीखें एक नज़र में

नीचे दी गई पाँचों दिनों की तारीखें एक साथ दी गई हैं। इसे सहेज लें, ताकि पूरे उत्सव की योजना आसानी से बन सके। Diwali 2026 date के आसपास की हर तिथि यहाँ मिल जाएगी। जहाँ पंचांगों में अंतर है, वहाँ अलग से लिख दिया गया है।

दिनत्योहारदिनाकमुख्य बात
1धनतेरसशुक्रवार, 6 नवंबरप्रदोष काल से मनाई जाएगी|
2छोटी दिवाली / नरक चतुर्दशीशनिवार, 7 नवंबर की शाम; अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की सुबहपंचांगों में अंतर संभव
3दिवाली, लक्ष्मी पूजारविवार, 8 नवंबरमुहूर्त शाम 5:37 से 7:34
4गोवर्धन पूजा, अन्नकूटमंगलवार, 10 नवंबरसुबह की पूजा बेहतर, प्रतिपदा दोपहर 2:00 तक
5भाई दूजबुधवार, 11 नवंबरतिलक का समय दोपहर 1:10 से 3:20

दिवाली के साथ-साथ November 2026 के सभी व्रत, त्योहार और शुभ तिथियाँ एक ही जगह देखना चाहते हैं? तो नवंबर 2026 कैलेंडर खोलें। यहाँ आपको पूरे महीने की तारीखें, तिथियाँ और प्रमुख पर्व आसानी से मिल जाएँगे, जिससे आप अपनी पूजा और खरीदारी की योजना पहले से बना सकेंगे।

निष्कर्ष

इस साल दिवाली का पूरा कैलेंडर आपके सामने है: धनतेरस 6 नवंबर, छोटी दिवाली 7 नवंबर, दिपावाली 8 नवंबर, गोवर्धन पूजा 10 नवंबर और भाई दूज 11 नवंबर। Diwali 2026 date को याद रखने के साथ-साथ अपने शहर का मुहूर्त ज़रूर जाँच लें, क्योंकि समय में कुछ मिनट का फर्क आ सकता है। सबसे ज़रूरी बात यह है कि त्योहार सिर्फ रस्मों का नहीं, अपनों के साथ समय बिताने और ज़रूरतमंद की मदद करने का भी है। आपकी और आपके परिवार की दिवाली खुशियों से भरी हो। शुभ दीपावली!

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Diwali 2026 kab hai?

दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। यह कार्तिक मास की अमावस्या की रात को मनाई जाती है और इसी शाम को लक्ष्मी-गणेश पूजा की जाएगी।

Lakshmi Puja 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है?

8 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:37 से 7:34 बजे तक है, यानी 1 घंटा 57 मिनट।

Dhanteras 2026 kab hai?

धनतेरस शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को है। त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह लगभग 10:30 बजे शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह करीब 10:47 बजे तक रहेगी।

Choti Diwali 2026 kab hai?

छोटी दिवाली, यानी नरक चतुर्दशी, के दीपक 7 नवंबर 2026 शनिवार की शाम जलाए जाते हैं। ड्रिक पंचांग के अनुसार अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की सुबह किया जाता है।

Govardhan Puja 2026 kab hai?

गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को है, जो कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर पड़ती है। प्रतिपदा दोपहर करीब 2:00 बजे तक रहेगी, इसलिए पूजा सुबह करना बेहतर है।

Annakut 2026 kab hai?

अन्नकूट 2026 की तारीख 10 नवंबर, मंगलवार है। यह गोवर्धन पूजा के ही दिन मनाया जाता है, जब भगवान को कई तरह के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।

Bhai Dooj 2026 kab hai?

भाई दूज बुधवार, 11 नवंबर 2026 को है, जो कार्तिक शुक्ल द्वितीया पर पड़ती है। तिलक का शुभ समय दोपहर करीब 1:10 से 3:20 बजे बताया गया है।

लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए कौन सा मंत्र जपें?

सरल मंत्र “ॐ महालक्ष्म्यै नमः” है। मान्यता है कि पूजा के शुभ मुहूर्त में इसे श्रद्धा और शांत मन से 108 बार, यानी एक माला, जपना चाहिए।

धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?

मान्यता है कि त्रयोदशी तिथि में चाँदी, सोना, बर्तन या झाड़ू खरीदना शुभ होता है। 6 नवंबर 2026 को सुबह लगभग 10:30 बजे के बाद खरीदारी शुरू की जा सकती है।

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